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देखो आया बसंत "ऋतुराज"! : Dekho aaya Basant "Rituraaj" !

      बंसत ऋतु को सर्वश्रेष्ठ ऋतु ऋतुराज कहा जाता है| इस समय धरा धानी परिधान धारण करती है, प्रकृति इतनी सुन्दर व मनमोहक हो जाती है जैसे सोलह श्रिंगार किये कोई दुल्हन हो, इसी समय हिंदी पंचांग का आखिरी मास फाल्गुन समाप्त होता है और प्रथम मास चैत्र आरंभ होता है और नववर्ष हमारा आता है|
     इसी मधुुमास का वर्णन करती और सुंदरता बताती मेरी कविता........!!!
  

खेतो के हुए पीले हाथ,
देखो आया ऋतुराज,
गई कंबलों की अब रात,
आया अब धुप का राज,
किया है कोकिल ने गान,
अब हुआ नया विहान,
धरा हुई अब धानी,
कण-कण आतुर करने को मनमानी,
खत्म हुआ फुलों का अवकाश,
उन पर मधुप तितलीयों का है वास,
देखो अब आया मधुमास,
हर डाली नव कोमल पात,
हर कली से अब हुआ प्रभात,
मादकता में बौराया आम,
चढ़ा लताओं को उन्माद,
चुमे उसने सीसम के गात,
कण कण को है चढ़ा प्रमाद,
देखो! आया बसंत ऋतुराज!
चली हवा बसंती दिन में,
हुई है मंगल हर शाम,
बजा है ढ़ोलक मिला है ताल,
नाचे देव, मनुज, भूत-बैताल,
अब आई सर्वोत्तम शिवरात,
मिलेंगे प्रथम और अंतिम मास,
अब आएगा नया साल,
होगी मस्ती और परिहास,
अब आएगा फागुन का मास,
प्रकृति ने किये सोलह श्रिंगार,
अंग अंग झलका ऋतु का प्यार,
आया ये बसंत मधुमास !
देखो! आया बसंत ऋतुराज!
                                ©गौरव पाण्डेय|

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