लंबे समय तक दूर रहने से उपजा संकोच जो कवि की प्रियतमा को उसके प्रिय(कवि) के पुन: पास आने में बाधक बन रहा है, इस विषम परिस्थिति में कवि अपने प्रियतमा को उसके प्रेम के प्रति मुखर करता है और किस प्रकार मर्यादाओं का सम्मान रखते हुए वह उससे जुड़ता है तथा एक सच्चे प्रेम को सार्थक करने की जुुगत करता है, इसी के प्रयासों का प्रासंगिक वर्णन करती ये मेरी कविता.......!!!
वापस आने से कतराते हो,
क्या तुम शरमाते हो?
या बंदिशे हैं कोई
जो उलझ जाते हो,
उठाओ तो पग को
बढ़ पड़ेंगे,
खुद-ब-खुद
मेरी तरफ,
नजरें झुकाए पलकों को उठाओ
परिदृश्य दिखाई देगा
मेरा तुम में,
पास आओ देखो मुझे,
महसूस करो,
ढूढ़ पाओगे खुद को मुझमें,
वीराने में गूँजती आवाज,
सुन पाओगे,
मयस्सर होगा चिराग,
सकल आलोकित देख पाओगे,
गुम है जिंदगानी जो फिर से पाओगे,
स्याह रात में झिलमिल तारे फिर दिख जाएँगें
कदम उठा जब पास आओगे,
देख रहे हो फिर विलंब कैसा?
विचारों में उलझे हो,
या संतप्त किसी से!
गर देख सको तो देखो
संलिप्त हो मुझी से
अतीत और अस्तित्व हो तुम,
मैं ही भविष्य तुम्हारा,
क्या अब भी न भापे?
महसूस तो हुआ होगा,
एक छिपा सा अनुराग तो जगा होगा,
वियोग से वैराग्य तो हुआ होगा,
प्रियतम मेरे,
मैं बुला तो सकता हूँ,
भुला नहीं सकता!
प्रयत्न करना तुम भी,
आ तो सकते हो,
अपने पैरों के कंपन को देखो,
फड़कती भुजाएँ,
आतुर हैं आलिंगन को देखो,
रंजिशे खो रही हैं,
अब तनमय तो हो सकते हो!
वापस आने से कतराते हो,
क्या तुम शरमाते हो?
या बंदिशे हैं कोई
जो उलझ जाते हो,
उठाओ तो पग को
बढ़ पड़ेंगे,
खुद-ब-खुद
मेरी तरफ,
नजरें झुकाए पलकों को उठाओ
परिदृश्य दिखाई देगा
मेरा तुम में,
पास आओ देखो मुझे,
महसूस करो,
ढूढ़ पाओगे खुद को मुझमें,
वीराने में गूँजती आवाज,
सुन पाओगे,
मयस्सर होगा चिराग,
सकल आलोकित देख पाओगे,
गुम है जिंदगानी जो फिर से पाओगे,
स्याह रात में झिलमिल तारे फिर दिख जाएँगें
कदम उठा जब पास आओगे,
देख रहे हो फिर विलंब कैसा?
विचारों में उलझे हो,
या संतप्त किसी से!
गर देख सको तो देखो
संलिप्त हो मुझी से
अतीत और अस्तित्व हो तुम,
मैं ही भविष्य तुम्हारा,
क्या अब भी न भापे?
महसूस तो हुआ होगा,
एक छिपा सा अनुराग तो जगा होगा,
वियोग से वैराग्य तो हुआ होगा,
प्रियतम मेरे,
मैं बुला तो सकता हूँ,
भुला नहीं सकता!
प्रयत्न करना तुम भी,
आ तो सकते हो,
अपने पैरों के कंपन को देखो,
फड़कती भुजाएँ,
आतुर हैं आलिंगन को देखो,
रंजिशे खो रही हैं,
अब तनमय तो हो सकते हो!

धन्यवाद !
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