पढ़िए उसका हाल, उसका अपने प्रियतमा से मिलने की आतुरता और व्याकुलता.......
इस कवि की कविता कौन?
किसमें खेवूँ ऩाव मैं अपनी,
इस जीवन की सरिता कौन?
भवसागर है अंतरमन,
लहरों में किसकी आहट है!
हो चकित कभी जो देखा तड़के
वही ऊपर आकाश पुराना!
है अपार अपार अनुभव और याद,
पर विस्मित सकल जगत है,
है रह गया बस 'तुम्हारा ध्यान',
चेतन मन में याद हो तुम
उस अवचेतन मिलन से,
बैठूँ एकातं मे आभास हो तुम
जैसे तुम संपर्क जुगत में,
मैं मौन वाचाल को आतुर,
कहो कोई तुम बात को आतुर
आतुर प्रथम मधुर मिलन को,
मैं आकुल प्रणय मिलन को,
अभिनंन्दित हो इस जीवन में तुम
इंतजार तुम्हारा है,
अब पवन बहार में भी
अनुभव व्यवहार तुम्हारा है,
दिखती सुरज की लालिमा
जैसे अवतार तुम्हारा है,
किसी कोयल की कूँक
लगती मुस्कान तुम्हारा है,
जब सूरज अस्ताचल को
संग चाँद चमकती चाँदनी
एैसे में जब मैं तनमय तुम में
कोई शीतल हवा गुजराती छू के
फिर लगता बस अभी-अभी
है आगमन तुम्हारा,
है कितना मधुर ये एहसास प्रिये,
क्या तुमको भी ऐसा आभाष प्रिये?
लेकिन अपरिचित, अनजान हूँ तुमसे,
इसका लिखता हूँ व्यवहार हूँ कब से
अलग मेरा अंदाज है सबसे,
हूँ नहीं दिखाता कुछ भी जग को,
हूँ नहीं छिपाता कुछ भी जग से,
मैं बैठा हूँ नदी किनार,
क्या तुम हो उस पार प्रिये ?
भ्रमित अधुरा हूँ मैं अब भी,
थे तुम भी मुझ बिन कब पूरे,
पर अभी-अभी हवा चली है
अभी-अभी पन्नें पलटे हैं,
पास रखी मेरी कलम ने,
अभी-अभी तोड़ा है मौन,
पूछाँ है एक प्रश्न और
कर डाला है मुझको मौन!
"इस कवि की कविता कौन?"
© गौरव पाण्डेय
Nice composition..... Keep it up
ReplyDeleteधन्यवाद|
DeleteThis comment has been removed by the author.
Deleteवाह बहुत सुन्दर।
ReplyDeleteऔर लिखो। ढेरों शुभकामनाएं।
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद|
Deleteबहुत-बहुत धन्यवाद|
DeleteNice Bhaiya...
ReplyDeleteNice bhaiya
ReplyDeleteThanks..
DeleteIs Kavi ki kavita wo ladki jiske liye hai ye kavita tumne likhi
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