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चेतना - A stream of consciousness.

 

 
          पढ़ते-पढ़ते आँखे थक गईं, मैं कुर्सी पर बैठा पाँवों को
आगे कि तरफ खिसका दिया और सीने पर किताब रख के
वहीं मेज के पास कुर्सी पर निढ़ाल लेट गया।
                  कुछ देर तक सब स्थगित ही रहा... एकदम अदम सा, ऐसे में बस जारी रहीं तो सांसे। कुछ वक्त बीतता है यूँ ही तब ही सहमी सी चाल से अचानक तुफां का रूप धारण कर याद अपने हाथ-पाँव मारना शुरू करते हैं और सहसा दीमाग भी हरकत में आ जाता है, कई बातें एक साथ बंद आँखो की अंधेरे पटल पर नाचती हुई चमक उठती हैं..... कुछ इस तरह मानों समय से पहले ही स्टेशन पर खड़ी सारी रेलगाड़ीयाँ एक साथ सीटी बजता हुई खुल गई हों और सारे यात्री घबड़ा कर दौड़ पड़े हो अपने-अपने ट्रेन की तरफ..,जैसे कोई भगदड़ मच गई हो... मानों जैसे तेज तुफान में सब उड़ा जा रहा हो... धूल, मिट्टी, पत्ते... सब, बगैर किसी गंतव्य की निश्चितता के...।
              मैंने शरीर की भाँती ही इन खयालों को भी अनियंत्रित-स्वतंत्र रखा और खुद-ब-खुद कुछ देर की उठा-पटक के बाद ये स्पष्ट और क्रमबद होने लगे। इनका प्रयोजन समझ आने लगा और यह भी स्पष्ट हो गया की इसके प्रायोजक स्वयं मेरे ख्वाब...मेरे सपने ही हैं, जिन्हें देख रखा है मैंने भविष्य के खातिर... अपने आने वाले सुनहरे कल के लिए। तभी एकदम त्वरित दिमाग अपना कदम बढ़ा इन सब उथल-पुथल को नियंत्रित और नेतृत्व के लिए आगे आता है और तभी महसूस होता है कानों के पास से 'समय' का बिना किसी संवाद के अपरिचित किसी अजनबी के भाँती सन्न से गुजरना
और इस वाकये से रोम-रोम चौकन्ना हो उठता है, धमनियों में
रक्तप्रवाह तीव्र हो जाता है, हृदय की धड़कन कानों तक साफ-
साफ सुनाई देने लगती है और बाह्य आधारित ध्यान भीतर की ओर केन्द्रीत हो सब पुनः सब शान्त हो जाता है, इस तुफान के
साथ जिसके ऊर्जा प्रभाव ने रोम-रोम को जगा दिया है।
                          अंदर के सदन में सभी विषयों पर चर्चा होती है, कईयों का विरोध भी होता है तो कई पारित भी होते हैं, और कल सत्ता अपनी ही हो को मद्देनजर रखते हुए योजनाओं को धरातल पर जल्द से जल्द उतारने का आदेश 'मुझे' दे दिया जाता है।
                     आँखों की सारी थकान मिट गई रहती है, दिमाग फिर सरपट तेज गति से दौड़ने को तैयार हो जाता है,
किताब पुनः खुल कर मेज पर रख जाती है, कॉपी उठ पड़ती
है, हाथ कलम थाम लेता है..... पन्नें पलटते जाते हैं और कलम
चलती जाती है....... ।

©Gaurav Pandey. 

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