हमने तुम्हारे बारे में बहुत सुना तो अपना हुनर आजमा कर फेसबूक पर तुम्हारी बड़ी मम्मी के प्रोफाइल से तुम्हारी तस्वीर निकाल लाए, तुम्हारा नाम फिर भी न पता होने के वजह से तुम्हारी प्रोफाइल तक पहुँचना मुनासिब न हो सका। तुम्हारी बस एक तस्वीर जिसमें तुम क्या ही खूबसूरत लग रही थी को देर तक अकेले में निहारते रहे और फोटू को बड़ा कर के तुम्हारे नयन-नक्श की मन ही मन बड़ाई करते रहें। देर रात जब नींद खुली तब तक भी तुम्हीं छायी थी सो लाजमी था तुम्हारा चेहरा ही आखों पर पहरा डाले हुए था सो मैंने फोन उठा कर तुम्हारा तस्वीर पुनः देखने लगा, देखते-देखते न जाने कब आँख लग गयी कुछ पता ही न चला। अगली सुबह जब मेरा मिजाज एकदम अच्छा था तब दादी के चाय को पूछने पर मैंने मुस्कुराकर हाँ कहा उस दिन पता है सबको कितना आश्चर्य हुआ था, मेरे हंस कर जवाब देने का, तुम नहीं जानोगी कभी मिली नहीं न मुझसे। यहाँ सब मुझे खड़ूस समझते है एकदम सख्त पर इन्हें क्या पता कितना रस कितना उन्माद है यहाँ बस सब बचा रखा है तुम्हारे लिए…. , मिलोगी तो न? हाँ मैं तो मिल ही लूँगा, पर कब होगी ये पहली मुलाकात, कुछ तय नहीं, कुछ पता नहीं।
जानती हो जबसे सुना है मैंने तुम्हारे बारे में और तस्वीर देखी है तुम्हारी, आने वाले हर एक कल की कल्पना मैंने तुम्हे जोड़कर करा है और इस पूर्ण विश्नास के साथ की इस जिंदगी तुम वो शक्स होगी जो मेरे मनोवृत्तानुसार होगी और मैं तुम्हारे, हाँ, थोडा-बहुत इधर उधर चलेगा और रहना भी चाहिए पर समन्वय की कोशिश हम दोनों के तरफ से परस्पर कायम रहेगी। वैसे मैं किसी से भी कुछ विशेष उम्मीद नहीं करता पर आत्मा ने जिसे स्वीकृती दे दी हो उसकी बात भी क्या करे!
सुनाई पड़े जो कोई बात मेरे बारे में तो सुन लेना और कोशिश करना कुछ जानने की बारे मे, क्या पता बे-मन से चले रास्ते की मंजिल कुछ अपनी जान पड़े और कुछ इस कदर भा जाए की आत्मा ही स्वीकार कर ले उसे।
दशहरे की छुट्टी में तुम तो हमेशा ही आती हो पर इस बार आऊंगा मैं भी, क्या पता किस्मत मिला दे हमें पर कोशिश करना तुम भी, सुनो! आ जाना...।
वर्ना, टापू के एक ऊँची चट्टान पर खड़े होकर अपने प्यार का चिल्ला कर इजहार कर देंगे शायद, यही सोच कर एक और पल हम तुमसे प्यार कर लेंगे।

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