समय सबको बराबर है पर समय कम है|कितने वेग से गुजर जा रहा है यह समय, पता तो चल रहा है परंतु कुछ हो नहीं पा रहा है, ऐसा नहीं की हम कुछ कर नहीं रहे हैं, ये कसक तो इसलिए है की मनोवृत्तानुसार कुछ मिल नहीं पा रहा है कारण संतेषहीनता नहीं है, कारण तो आशातीत परिणाम का नहीं मिल पाना है| यदि परिणाम कुछ मन के अनुसार आ भी रहा है फिर भी असंतोष के उपजने का कारण शायद मात्रा में कमी रह रही है| लेकिन, ऐसा बार-बार निरंतर क्यों हो रहा है? जवाब में कई कारण उजागर हो रहे है, शायद कहीं न कहीं प्रयास में कमी रह जा रही है, मेहनत की दिशा ठीक नहीं है, मेहनत की मात्रा कम है या भाग्य साथ न दे रहा है या फिर केवल ईच्छा ही ईच्छा रह रही है, योजनाओं पर काम हो ही नहीं रहा है| कारण प्रत्यक्ष है,अब चुनाव आपका है, अब यह आप पर निर्भर करता है की आप कितनी शुद्धता से ईमानदारी एवं सहजता से मौजुद दोष को अविलंब स्वीकार करते हैं, स्वीकार्यता और सुधार जितनी शीघ्रता से होग परिणाम में सुधार की गुंजाईश भी उतनी ही ज्यादा होगी| अपने तरफ से हो रहीं गलतीयाँ तो हम सुधार सकते है यदि ईसमें कहीं भाग...