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Showing posts from August, 2018

कहानी - मौन प्रेम । Silent love

         हमने तुम्हारे बारे में बहुत सुना तो अपना हुनर आजमा कर फेसबूक पर तुम्हारी बड़ी  मम्मी के प्रोफाइल से तुम्हारी तस्वीर निकाल लाए, तुम्हारा नाम फिर भी न पता होने के वजह से तुम्हारी प्रोफाइल तक पहुँचना मुनासिब न हो सका। तुम्हारी बस एक तस्वीर जिसमें तुम क्या ही खूबसूरत लग रही थी को देर तक अकेले में निहारते रहे और फोटू को बड़ा कर के तुम्हारे नयन-नक्श की मन ही मन बड़ाई करते रहें। देर रात जब नींद खुली तब तक भी तुम्हीं छायी थी सो लाजमी था तुम्हारा चेहरा ही आखों पर पहरा डाले हुए था सो मैंने फोन उठा कर तुम्हारा तस्वीर  पुनः देखने लगा, देखते-देखते न जाने कब आँख लग गयी कुछ पता ही न चला। अगली सुबह जब मेरा मिजाज एकदम अच्छा था तब दादी के चाय को पूछने पर मैंने मुस्कुराकर हाँ कहा उस दिन पता है सबको कितना आश्चर्य हुआ था, मेरे हंस कर जवाब देने का, तुम नहीं जानोगी कभी मिली नहीं न मुझसे। यहाँ सब मुझे खड़ूस समझते है एकदम सख्त पर इन्हें क्या पता कितना रस कितना उन्माद है यहाँ बस सब बचा रखा है तुम्हारे लिए…. , मिलोगी तो न? हाँ मैं तो मिल ही लूँगा, पर कब होगी ये पहली...