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Showing posts from September, 2017

इरादे है बुलंद फिर बड़ा तो हो| Irade hain buland fir bda to ho.

इरादे हैं बुलंद फिर बड़ा तो हो| नया कुछ नहीं पर नया तो हो, इरादे है बुलंद फिर बड़ा तो हो,  ये बाँध तो टूटे-बहाव तो आए, पतली धारओं का भी स्वाभिमान तो है, हर लहरो का साहिल से टकराव तो हो, तार-तार हो घमंड की बाढ़ तो आए कुछ हो रहा अच्छा आवाज तो आए,  इस रास्ते में कोई ठोकर तो दिख जाए, बढ़त हो मजबूत के हर कदम जीत हो,  मधुर हो जीवन के हर क्षण प्रीत हो,  छप्पर का भी अपना इक भाव तो हो,  जो सिखा दे के वो धूप-छाँव तो हो, मिजाज है बासी कुछ ताजगी तो आए, यूँ सफर है अकेला कोई साथ तो आए, मुसलसल बीत रहा है हर लम्हा, यूँ क्यों बीत जाए, कुछ बने यादें की याद तो आए, अब सांसो ने जोर पकड़ा, भुजाएँ भी फड़फड़ाई, कुछ हो के नया आई अंगड़ाई, सब हो गया बासी-सब रह गया पुराना, नया कुछ नहीं पर नया तो हो, इरादे है बुलंद फिर बड़ा तो हो|